बिहार में मोदी की ये कैसी लहर
लोकसभा चुनावी नतीजों का विश्लेषण हर कोई अपने तरीके से कर रहा है I मोदी लहर , सुनामी , कहर , हिंदुत्व की जीत जैसे नाम दिए जा रहे हैं I ये सारी उपाधियाँ यूपी के नतीजों को देखते हुए पहली नज़र में सही भी लगती हैं I लेकिन बिहार के नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है की यहाँ न तो मोदी की लहर थी और न ही मोदी कहर I बिहार में बीजेपी , एलजेपी और आरएलएसपी गठबंधन को मिलाकर कुल 38.8 फीसदी वोट मिले हैं I जबकी गैर एनडीए दलों यानी आरजेडी , कांग्रेस , जेडीयू , एनसीपी और बीएसपी को लगभग 49 फीसदी वोट मिले I हालंकि नतीजे एनडीए के हक़ में हैं और 31 सीटों के साथ एनडीए नंबर वन पर है I जबकि गैर एनडीए दलों के पास सिर्फ 9 सीटें ही हैं , जिनमें जेडीयू की भी 2 सीटें शामिल हैं I पहली नज़र में देखने पर ये आंकड़े बिहार में मोदी लहर या कहर जैसे ही दिखेंगे I लेकिन जिन आंकड़ों को देख कर मोदी लहर की बात की जा रहे है वही आंकड़े इस लहर को खारिज करती है I बिहार में 40 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए दलों को कुल 38.8 फीसदी वोट मिले , जबकि गैर एनडीए दलों { जेडीयू , आरजेडी , कांग्रेस , लेफ्ट , एनसीपी } को लगभग 49 फीसदी वोट मिले I यानी गैर एनडीए दलों को एनडीए से 10 फीसदी ज़्यादा वोट मिले I एनडीए और यूपीए से अलग अपने बूते पर चुनाव लड़ने वाली जेडीयू को 2 सीटें मिलीं जबकि 4 सीटों पर पार्टी नंबर 2 पर रही I गैर एनडीए दलों यानी जेडीयू , आरजेडी और कांग्रेस अगर एक प्लेटफार्म पर चुनाव लड़ती तो नतीजे कुछ और ही होते I जिन सीटों पर बीजेपी और एलजेपी के प्रत्याशी विजयी रहे हैं उन सीटों में से 18 ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी और एलजेपी उम्मीदवारों की जीत सिर्फ गैर एनडीए वोटों के बिखराव की वजह से हुई है I उन 18 सीटों का ज़िक्र करना यहां बेहद ज़रूरी है -- औरंगाबाद , बेगुसराई , दरभंगा , गया , जहानाबाद , जमुई , झंझारपुर , खगडिया , मधुबनी , महाराजगंज , मुंगेर , पश्चिम चंपारण , पाटलिपुत्र , समस्तीपुर , सारण , सासाराम , उजीयारपुर और वैशाली I ये सभी ऐसी 18 सीटें हैं जहां बीजेपी और एलजेपी उम्मीदवारों की जीत सिर्फ और सिर्फ गैर एनडीए दलों के बीच बंटे वोटों की वजह से हुई है I जो लोग मुसलिम , यादव या महादलित वोटरों में मोदी की हिस्सेदारी बता कर एक सेकुलर और सर्वमान्य छवि बनाकर , इस जीत को और बड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें पहले इन 18 सीटों का गुना भाग कर लेना चाहिए I अगर एनडीए के मुकाबले आरजेडी , जेडीयू और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ी होती तो आंकड़े इस तरह होते -- आरजेडी + जेडीयू + कांग्रेस + एनसीपी + लेफ्ट मिलकर कुल 27 सीटें जबकि बीजेपी + एलजेपी + आरएलएसपी मिलकर कुल 13 सीटें I अब मोदी लहर , कहर , सुनामी की बात करने वाले हमें या इस देश को समझा दें की क्या वाकई ये मोदी लहर से उपजी जीत है I कुछ लोग इसे हाइपोथेटिकल सिचुएशन या परिकल्पनाओं की कहानी कह सकते हैं I लेकिन क्या इस बात में भी उन्हें कोई शक होगा की बिहार में मोदी की जीत सिर्फ और सिर्फ गैर एनडीए दलों के बिखराव का नतीजा है I यूपी में मोदी के सारे लहर और अमित शाह का चुनावी मैनेजमेंट कबूल है I लेकिन बिहार में तो न अमित शाह का मैनेजमेंट था और ना ही यहां के लोग किसी लहर में दिखे I उनके पास मोदी के मुकाबले नितीश का विकास मॉडल था I लेकिन लोकतंत्र में चुनाव के बाद किसी भी पार्टी को मिलने वाले नंबर ही सबसे अहम होते हैं I और इस बार बिहार की जनता ने ये नंबर एनडीए की झोली में डाला है I इसलिए इन नंबरों का सम्मान किया जाना चाहिए I और किसी राग द्वेष के बिना सबका का भला और सबका विकास होना चाहिए I
No comments:
Post a Comment